गिरियक की रसमाधुरी के माधुर्य में डूब ना गये तो फिर कहिएगा



पावापुरी. पटना-रांची हाइवे पर बिहारशरीफ और नवादा के बीच में एक छोटा सा कस्बा है, गिरियक. यह पावापुरी का प्रखंड मुख्यालय है. गिरियक की पहचान अब स्वादिष्ट रस भरी और रस मलाई के रूप में है. यहां की रसमाधुरी इतनी खास है कि रोज हाइवे से गुजरने वाले स्वाद के शौकीन जरूर चखते हैं. आधा दर्जन मिठाई कारोबारी का फोकस रसमलाई और रसमाधुरी पर है. 30 रुपये में दो रसमाधुरी इतनी आनंदित कर देगी कि आप चार तो जरूर खाएंगे. आपके पास रसमलाई का भी ऑप्शन है जो 25 में दो आती है. यही नहीं यदि आप डायबिटीज की बीमारी से ग्रस्त हैं तो आपके लिए सुगर फ्री रसमलाई और रसमाधुरी भी उपलब्ध है. केवल यह क्रमश: 40 और 30 रुपये में दो पीस आती है.
नहीं खरीदते हैं पैकेट वाला दूध, केवल गाय-भैंस के दूध का होता है प्रयोग
यहां के प्रसिद्ध आनंद मिष्ठान्न भंडार के ऑनर आनंद कुमार बताते हैं कि रसमलाई बनाने में कारीगर पैकेट के दूध का प्रयोग नहीं करते हैं. इसके लिए उन्होंने आसपास के विश्वसनीय दूध विक्रेताओं पर ही भरोसा करते हैं जो शुद्ध दूध मुहैया कराते हैं. उस दूध को वे केसर डालकर उबालते हैं. केसर के पीलापन आ जाने के बाद इसमें कम चीनी का प्रयोग करते हैं. इसके साथ ही जब छेना तैयार हो जाता है तो उसे ड्राइ फ्रूट डाल कर दोबार गर्म करते हैं. इसके कारण रसमाधुरी काफी रसीली और स्वादिष्ट होती है जबकि रसमलाई में केसर और ड्राइफ्रूट का इस्तेमाल नहीं करते हैं बाकी यही तरीका होता है रस मलाई बनाने का. पूरे कस्बे में राेज लगभग 1000 पीस रसमाधुरी और रसमलाई बिकती है जो कई बार बढ़कर 2000 भी हो जाता है.
राजगीर महोत्सव की शान के साथ पावापुरी मेडिकल कॉलेज में बेस्ट डिश
यहां की रसमाधुरी राजगीर महोत्सव की शान बन चुकी है. 2014 में तत्कालीन डीएम पलका साहनी ने इसे बेस्ट डिश ऑफ बिहार घोषित किया था. इसके विक्रेताओं को प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित भी किया गया था. राजगीर महोत्सव के अलावे नालंदा सृजन दिवस और पावापुरी मेडिकल कॉलेज में आयोजित स्वीट डिश फेस्टिवल में भी रसमाधुरी का जलवा दिख चुका है. रसमलाई के विक्रेता रमेश कुमार कहते हैं कि अब हम इसका प्रसार राजधानी तक करने की रणनीति बना रहे हैं ताकि पूरा प्रदेश इसका स्वाद चख सके जो अभी केवल रांची-पटना हाइवे से गुजरने वाले लोगों को ही मुहैया हाे रही है.

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