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पावापुरी राइस मिल में आम दिनों की तरह होता रहा संचालन

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-संचालक ने कहा इडी की जांच में कई तथ्यों को छुपाया गया है -संपत्ति का मूल्यांकन सही तरीके से नहीं करने का लगाया आरोप  पावापुरी।  पावापुरी राइस मिल के ऊपर धान घोटाले में हुई प्रर्वतन निदेशालय यानी ईडी की कार्रवाई की खबरों के बाद गुरुवार को मिल में आम दिनों की तरह कामकाज होता रहा। पावापुरी में इस मामले को लेकर गहमागहमी रही लेकिन मिल के संचालन पर कोई खास असर देखने को नहीं मिला। इधर राइस मिल के संचालक दिनेश प्रसाद गुप्ता ने ईडी की कार्रवाई पर सवाल उठाया है। उनका कहना है कि ईडी की जांच निष्पक्ष नहीं है। ईडी द्वारा संपत्तियों का मूल्यांकन 27 मार्च 2018 के हिसाब से किया गया है। 2006 से अर्जित संपत्तियों का भी मूल्यांकन अटैचमेंट किया गया है। अगर संपत्ति खरीद के तिथि से मूल्यांकन होगा तो जमीन का मूल्य 50 लाख होगा जबकि ईडी द्वारा इसका मूल्यांकन एक करोड़ आठ लाख रुपये किया है। लोन से खरीदी गयी है मिल की संपत्ति दिनेश ने अपना पक्ष जारी करते हुए कहा है कि पावापुरी राइस मिल और पावापुरी कंपनी की संपत्ति लोन के माध्यम से खरीदी गयी है साथ ही बिहार सरकार से 90 लाख 15 हजार का अनुदान भी ...

धान घोटाला मामले में ईडी ने जब्त की पावापुरी राइस मिल की 4.21 करोड़ की संपत्ति

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पटना.  राज्य में हुए धान घोटाला मामले में बड़ी कार्रवाई करते हुए ईडी ने बुधवार को बड़ी कार्रवाई की. इसके तहत नालंदा जिला के डिफॉल्टर राईस मिलर मेसर्स पावापुरी राइस मिल की चार करोड़ 21 लाख से ज्यादा की संपत्ति को जब्त कर लिया. ईडी की विशेष टीम ने मिल मालिक दिनेश प्रसाद गुप्ता के खिलाफ गिरियक थाना में भ्रष्टाचार से जुड़ा मामला दर्ज किया गया था. इन्होंने धान की खरीद सरकार से कर ली, लेकिन चावल बदले में नहीं लौटाया. इसने करीब एक लाख 29 हजार क्विंटल चावल का गबन इस तरह से कर लिया था. इसके अलावा बिहार राज्य खाद्य आपूर्ति निगम को 54 हजार 165 क्विंटल चावल नहीं लौटाया था. इस तरह राज्य सरकार का करीब 10 करोड़ 15 लाख रुपये का नुकसान सीधे तौर हुआ है. ईडी की जांच में यह बात सामने आयी कि पावापुरी राइस मिल में दिनेश प्रसाद गुप्ता ने अपने भाई बिनेश प्रसाद गुप्ता, मनोज कुमार और पिता रामचंद्र साव को पर्टनर बना रखा था. खूब लगाये जमीन मेंं रुपये जांच में यह भी पता चला कि वित्तीय वर्ष 2012-13 और 2013-14 के दौरान भारी मात्रा में कैश जमा किया था. पूछताछ के दौरान उन्होंने बैंक का पासबुक...

तेतरावां में है बुद्ध की स्पर्श मुद्रा में काले पत्थर की देश की सबसे बड़ी मूर्ति

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-गुमनामी में है बुद्ध की यह स्थली, अभी भी नहीं मिल सका है पर्यटन स्थल का दर्जा पावापुरी। अनिल उपाध्याय नालंदा जिले के तेतरावां में बुद्ध की काले पत्थर की देश की सबसे बड़ी मूर्ति स्थापित है. तकरीबन बारह फुट ऊंची और छह फुट चौड़ी यह मूर्ति भूमि स्पर्श मुद्रा में है जो दुर्लभ है. यह मूर्ति यहां पर तालाब की खुदाई के दौरान मिली थी. इन्हें स्थानीय ग्रामीण भैरो बाबा कहकर पुकारते हैं. पुरातत्व विदों की मानें तो 10वीं सदी की यह मूर्ति पाल काल के दौरान निर्मित हैं. इस मूर्ति में दर्शाया गया है कि भगवान बुद्ध को जब बोधगया में तपस्या के बाद ज्ञान की प्राप्ति हुई तब उन्होंने साक्षी मानते हुए बोधगया की भूमि का स्पर्श कर अभिवादन किया था. उनकी यह मुद्रा पाल काल में बनी बुद्ध की मूर्तियों में दिखायी देती है. इन सब खासियतों के बावजूद तेतरावां गुमनामी में है. जहां बुद्ध से जुड़े छोटे से छोटे स्थल भी पर्यटन के मानचित्र पर आ गये और वहां विकास की गंगा बहती है लेकिन अभी तक यह भूमि अपेक्षित है. पावापुरी से महज 8 किमी और जिला मुख्यालय बिहारशरीफ से 12 किमी दूर तेतरावां विकास के पैमाने से कोसों दू...

अच्छी खबर: सौर ऊर्जा से रोशन होगा पावापुरी का जल मंदिर

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 -प्रदूषण से मिलेगी मुक्ति, सौर ऊर्जा का होगा सकारात्मक इस्तेमाल पावापुरी। जैनियों की प्रसिद्ध तीर्थ स्थली पावापुरी का जलमंदिर अब सौर ऊर्जा से राेशन होगा. सरकार की योजना के मुताबिक बिहार रिन्यूएबल एनर्जी डेवलपमेंट एजेंसी यानी ब्रेडा जलमंदिर परिसर को रोशन करेगी. प्रयोग के तौर पर शुरूआत में चार सौर ऊर्जा का पैनल और बैट्री जैन श्वेतांबर भंडार को हवाले किया गया है. इसके बाद पूरा परिसर सौर उर्जा से रोशन करने की योजना है. इसके लिए कवायद शुरु कर दी गयी है. ब्रेडा कंपनी ने पहले आकर मुआयना किया. इसके बाद प्रयोग के तौर पर चार सौर ऊर्जा पैनल प्रदान किया गया है. इसे अभी लगा भी दिया गया है. अभी जल मंदिर में विद्युत आपूर्ति की व्यवस्था सुचारू रखने के लिए जेनरेटर सेट की व्यवस्था की गयी है. इससे प्रदूषण होता है यदि सौर ऊर्जा पूरी तरह लग गया तो इसके बाद प्रदूषण से पूरी तरह मुक्ति मिल जाएगी.   मुख्यमंत्री नवीकरण योजना के तहत लग रहा सौर ऊर्जा मुख्यमंत्री नवीन एवं नवीकरण योजना अंतर्गत परिसर में 25-25 किलो वाट के बैकअप वाले सौर ऊर्जा प्लांट लगाया जा रहा है. प्लांट लगाने का जिम्मा ब्रेडा कम...

गिरियक की रसमाधुरी के माधुर्य में डूब ना गये तो फिर कहिएगा

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पावापुरी. पटना-रांची हाइवे पर बिहारशरीफ और नवादा के बीच में एक छोटा सा कस्बा है, गिरियक. यह पावापुरी का प्रखंड मुख्यालय है. गिरियक की पहचान अब स्वादिष्ट रस भरी और रस मलाई के रूप में है. यहां की रसमाधुरी इतनी खास है कि रोज हाइवे से गुजरने वाले स्वाद के शौकीन जरूर चखते हैं. आधा दर्जन मिठाई कारोबारी का फोकस रसमलाई और रसमाधुरी पर है. 30 रुपये में दो रसमाधुरी इतनी आनंदित कर देगी कि आप चार तो जरूर खाएंगे. आपके पास रसमलाई का भी ऑप्शन है जो 25 में दो आती है. यही नहीं यदि आप डायबिटीज की बीमारी से ग्रस्त हैं तो आपके लिए सुगर फ्री रसमलाई और रसमाधुरी भी उपलब्ध है. केवल यह क्रमश: 40 और 30 रुपये में दो पीस आती है. नहीं खरीदते हैं पैकेट वाला दूध, केवल गाय-भैंस के दूध का होता है प्रयोग यहां के प्रसिद्ध आनंद मिष्ठान्न भंडार के ऑनर आनंद कुमार बताते हैं कि रसमलाई बनाने में कारीगर पैकेट के दूध का प्रयोग नहीं करते हैं. इसके लिए उन्होंने आसपास के विश्वसनीय दूध विक्रेताओं पर ही भरोसा करते हैं जो शुद्ध दूध मुहैया कराते हैं. उस दूध को वे केसर डालकर उबालते हैं. केसर के पीलापन आ जाने के बाद इस...

बिहारवासियों! बिहार के पावापुरी को तो आपने देखा, राजस्थान के इस पावापुरी को जानते हैं आप?

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-बिहार के पावापुरी से इतर राजस्थान का पावापुरी है समृद्ध  -गो वंश की होती है सेवा, पावापुरी के गांव मंदिर की बनी है प्रतिकृति  पावापुरी(नालंदा)। अनिल उपाध्याय   बिहार में रहने वाले लोगों ने तो नालंदा जिले के पावापुरी का भ्रमण किया ही होगा. नालंदा का यह पावापुरी, जैन धर्म के 24 वें तीर्थंकर भगवान महावीर स्वामी को निर्वाण की प्राप्ति हुई थी. यहां दस से ज्यादा मंदिर भगवान महावीर को ज्ञान मिलने से लेकर अंतिम संस्कार होने के साक्षी हैं. लेकिन क्या आप जानते हैं कि राजस्थान में भी एक पावापुरी धाम है. यदि नहीं जानते हैं तो आपको हम उस पावापुरी के बारे में विस्तार से बताएंगे और तस्वीरें भी साझा करेंगे. वहां ना केवल गो वंश की सेवा होती है बल्कि नालंदा के पावापुरी के गांव मंदिर और जलमंदिर की प्रतिकृति भी बनी है. पावापुरी तीर्थधाम में 90 हजार वर्गफुट जमीन पर विशाल मंदिर का निर्माण करवाया गया है जो हू ब हू बिहार के पावापुरी में स्थित जैन श्वेतांबर मंदिर की तरह है. वही परिसर में जलमंदिर की प्रतिकीर्ति भी बनी हुई है. श्वेताम्बर मंदिर बाहर से बंस...

आपने देखा है बिहार का ताजमहल? यदि नहीं तो देखिए पावापुरी का जलमंदिर

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पावापुरी। जैन धर्म के 24वें तीर्थंकर भगवान महावीर स्वामी की निर्वाण भूमि पावापुरी जैन धर्मावलंबियों का आस्था का केंद्र है। यह नालंदा जिला मुख्यालय से करीब 11 किमी दूर है। यहां सालों भर देश-विदेश के श्रद्धालु आते रहते हैं। हर साल दीपावली के मौके पर भगवान महावीर की विशेष पूजा की जाती है। इसमें भाग लेने के लिए कई देशों के श्वेताम्बर व दिगंबर जैन श्रद्धालु आते हैं। कार्तिक अमावस्या की मध्य रात्रि में भगवान महावीर का निर्वाण हुआ था। जैनियों के 24 वें तीर्थंकर भगवान महावीर की निर्वाण स्थली पावापुरी में अंतिम संस्कार भूमि पर जल मंदिर बना हुआ है. महावीर के बड़े भाई नंदीवर्धन ने इस मंदिर का निर्माण कराया था जिसपर पूनमचंद सेठिया ने संगमरमर मढ़वाया. अपने स्थापत्य के लिए मशहूर इस मंदिर को बिहार का ताजमहल कहा जाता है. इसका कारण यह है कि जहां ताजमहल किसी की याद में बनाया गया वहीं यह मंदिर भी महावीर की याद में बनाया गया है. दोनों अंतिम संस्कार भूमि पर अवस्थित है. दोनों का स्थापत्य भी अप्रतीम है और जिस संगमरमर पत्थर मकराना से ताजमहल बना है उसी पत्थर से बिहार का यह जलमंदिर भी बना हुआ है....